स्पेस डॉकिंग मिशन (SpaDeX) की सफलता
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 7 जनवरी को वी नारायणन को अपना नया निदेशक बनाया और उन्होंने 14 जनवरी को पदभार संभाल लिया।
इसी दौरान ISRO ने अपने स्पेस डॉकिंग मिशन (SpaDeX) में बड़ी सफलता हासिल की। यह मिशन भारत की अंतरिक्ष योजनाओं के लिए बहुत खास है।
SpaDeX मिशन क्या है?
SpaDeX (Space Docking Exercise) मिशन का उद्देश्य अंतरिक्ष में दो उपग्रहों को एक-दूसरे से जोड़ना था।
ISRO ने 30 दिसंबर को PSLV रॉकेट से दो छोटे उपग्रह – SDX01 (चेज़र) और SDX02 (टारगेट) – लॉन्च किए।
इन्हें पृथ्वी की कक्षा में 20 किमी की दूरी पर रखा गया। बाद में दोनों उपग्रहों को धीरे-धीरे पास लाया गया और एक-दूसरे से जोड़ा गया।
डॉकिंग प्रक्रिया कैसे हुई?
डॉकिंग के दौरान उपग्रहों के बीच की दूरी को कम किया गया:
- 20 किमी से 5 किमी, फिर 1.5 किमी, 500 मीटर, 225 मीटर, 15 मीटर और अंत में 3 मीटर।
- दोनों उपग्रहों को जोड़ने के बाद बिजली का आदान-प्रदान और अन्य परीक्षण किए गए।
- मिशन पूरा होने के बाद उपग्रहों को उनके काम के लिए अलग कर दिया गया।
चंद्रयान-4 और स्पेस स्टेशन के लिए तैयारी
SpaDeX मिशन भारत के आने वाले अंतरिक्ष मिशनों के लिए बहुत अहम है:
- चंद्रयान-4 मिशन: इस मिशन में चंद्रमा से मिट्टी और सैंपल लाकर पृथ्वी पर भेजा जाएगा।
- भारतीय स्पेस स्टेशन: 2028 में पहला मॉड्यूल लॉन्च किया जाएगा और अन्य मॉड्यूल को अंतरिक्ष में जोड़कर स्टेशन बनाया जाएगा।
- मानव मिशन: 2040 तक भारत चंद्रमा पर मानव भेजने की तैयारी कर रहा है।
चुनौतियां और सफलता
डॉकिंग प्रक्रिया पहले 7 जनवरी को होनी थी, लेकिन तकनीकी कारणों से इसे 9 जनवरी तक टाल दिया गया। ISRO ने हर चुनौती को पार करते हुए मिशन को सफल बनाया।
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भविष्य की योजनाएं
SpaDeX की सफलता से साबित होता है कि भारत अंतरिक्ष विज्ञान में लगातार आगे बढ़ रहा है।
ISRO के नए निदेशक वी नारायणन के नेतृत्व में भारत चंद्रमा और अंतरिक्ष में नई उपलब्धियां हासिल करने के लिए तैयार है।
SpaDeX मिशन की सफलता भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक बड़ा कदम है। इससे चंद्रयान-4 और भारतीय स्पेस स्टेशन जैसी योजनाओं को मजबूत आधार मिलेगा। ISRO ने एक बार फिर दिखा दिया कि भारत का अंतरिक्ष भविष्य उज्ज्वल है।